श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 38: अभिमन्युके द्वारा शल्यके भाईका वध तथा द्रोणाचार्यकी रथसेनाका पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.38.2 
संजय उवाच
शृणु राजन् कुमारस्य रणे विक्रीडितं महत्।
बिभित्सतो रथानीकं भारद्वाजेन रक्षितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! युद्धभूमि में राजकुमार अभिमन्यु की प्रचण्ड रणध्वनि का वर्णन सुनिए। वह द्रोणाचार्य द्वारा रक्षित रथियों की सेना को भेदना चाहता था।
 
Sanjaya said, "O King! Listen to the description of the huge battle cry of Prince Abhimanyu on the battlefield. He wanted to pierce the army of charioteers protected by Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)