श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 38: अभिमन्युके द्वारा शल्यके भाईका वध तथा द्रोणाचार्यकी रथसेनाका पलायन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.38.18 
चापमण्डलमेवास्य विस्फुरद् दिक्ष्वदृश्यत।
सुदीप्तस्य शरत्काले सवितुर्मण्डलं यथा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जैसे शरद ऋतु में सूर्य का चमकीला मण्डल दिखाई देता है, उसी प्रकार अभिमन्यु का गोलाकार धनुष सम्पूर्ण दिशाओं में चमकता हुआ दिखाई देता था ॥18॥
 
Just as the bright circle of the Sun is visible in the autumn season, similarly the circular bow of Abhimanyu was seen shining in all directions. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)