धृतराष्ट्र उवाच
तथा प्रमथमानं तं महेष्वासानजिह्मगै:।
आर्जुनिं मामका: संख्ये के त्वेनं समवारयन्॥ १॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जब अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु अपने बाणों से बड़े-बड़े धनुर्धरों को मथ रहा था, तब मेरी ओर से किस योद्धा ने उसे युद्ध में रोका था?॥1॥
Dhritarashtra asked - Sanjay! When Arjun's son Abhimanyu was churning the great archers with his arrows, which warrior from my side stopped him in the battle?॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)