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mahabharat 7.37.36: अभिमन्यु के सुवर्ण पंखयुक्त बाणों से घायल हुए महाबाहु शल्य को देखकर आपके समस्त सैनिक सिंह द्वारा सताये हुए मृगों के समान शीघ्रतापूर्वक भागने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.37.36 
सम्प्रेक्ष्य तं महाबाहुं रुक्मपुङ्खै: समावृतम्।
त्वदीया: प्रपलायन्ते मृगा: सिंहार्दिता इव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु के सुवर्ण पंखयुक्त बाणों से घायल हुए महाबाहु शल्य को देखकर आपके समस्त सैनिक सिंह द्वारा सताये हुए मृगों के समान शीघ्रतापूर्वक भागने लगे।
 
Beholding the mighty-armed Shalya pierced by Abhimanyu's golden-feathered arrows, all your soldiers began to flee hurriedly like deer harassed by a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)