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mahabharat 7.37.28: जिस प्रकार सर्प बिल में घुस जाता है, उसी प्रकार अभिमन्यु द्वारा छोड़ा गया बाण कर्ण के शरीर और कवच को भेदता हुआ बड़े वेग से पृथ्वी में समा गया।   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.37.28 
तस्य भित्त्वा तनुत्राणं देहं निर्भिद्य चाशुग:।
प्राविशद् धरणीं वेगाद् वल्मीकमिव पन्नग:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार सर्प बिल में घुस जाता है, उसी प्रकार अभिमन्यु द्वारा छोड़ा गया बाण कर्ण के शरीर और कवच को भेदता हुआ बड़े वेग से पृथ्वी में समा गया।
 
Just like a serpent enters a hole, similarly the arrow shot by Abhimanyu pierced Karna's body and armour and entered the earth with great force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)