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mahabharat 7.37.17-18: इसी प्रकार विविंशतिन ने सत्तर, कृतवर्मा ने सात, बृहद्बल ने आठ, अश्वत्थामा ने सात, भूरिश्रवाण ने तीन, मद्रराज शल्य ने छः, शकुन्य ने दो और राजा दुर्योधन ने तीन बाणों से अभिमन्यु को घायल कर दिया ॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  7.37.17-18 
विविंशतिस्तु सप्तत्या कृतवर्मा च सप्तभि:।
बृहद्‍बलस्तथाष्टाभिरश्वत्थामा च सप्तभि:॥ १७॥
भूरिश्रवास्त्रिभिर्बाणैर्मद्रेश: षड्‍‍भिराशुगै:।
द्वाभ्यां शराभ्यां शकुनिस्त्रिभिर्दुर्योधनो नृप:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार विविंशतिन ने सत्तर, कृतवर्मा ने सात, बृहद्बल ने आठ, अश्वत्थामा ने सात, भूरिश्रवाण ने तीन, मद्रराज शल्य ने छः, शकुन्य ने दो और राजा दुर्योधन ने तीन बाणों से अभिमन्यु को घायल कर दिया ॥17-18॥
 
Similarly, Abhimanyu was wounded with seventy arrows by Vivimshatina, seven by Kritavarman, eight by Brihadbala, seven by Ashwatthama, three by Bhurishravane, six by Madraraja Shalya, two by Shakunya and three by King Duryodhana. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)