Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.37.15-16: इस प्रकार वह घोर एवं भीषण युद्ध चल रहा था। उसमें आपके पुत्र दु:शासन ने अभिमन्यु को नौ बाणों से, दु:शासन ने बारह बाणों से, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने तीन बाणों से तथा द्रोणाचार्य ने विषैले सर्पों के समान भयंकर सत्रह बाणों से घायल कर दिया। | mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार वह घोर एवं भीषण युद्ध चल रहा था। उसमें आपके पुत्र दु:शासन ने अभिमन्यु को नौ बाणों से, दु:शासन ने बारह बाणों से, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने तीन बाणों से तथा द्रोणाचार्य ने विषैले सर्पों के समान भयंकर सत्रह बाणों से घायल कर दिया।
In this way that fierce and gruesome battle was going on. In it your son Dusahasan pierced Abhimanyu with nine arrows, Dushasan with twelve, Sharadwan's son Kripacharya with three and Dronacharya with seventeen arrows as dangerous as poisonous snakes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥