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mahabharat 7.37.14: उस समय जब विरोधी योद्धा एक दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे, तब भी अभिमन्यु और उनमें से कोई भी युद्ध से विमुख नहीं हुआ ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.37.14 
शूराणां युध्यमानानां निघ्नतामितरेतरम्।
अभिमन्यो: परेषां च नासीत् कश्चित् पराङ्मुख:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब विरोधी योद्धा एक दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे, तब भी अभिमन्यु और उनमें से कोई भी युद्ध से विमुख नहीं हुआ ॥14॥
 
At that time, while the opposing warriors were attacking each other, neither Abhimanyu nor any of them turned away from the fight. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)