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mahabharat 7.37.12: तब उन योद्धाओं ने अभिमन्यु से चिढ़कर उसे विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों से घेर लिया और उस अजेय सुभद्रापुत्र को मार डालने की इच्छा से उसे घेर लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.37.12 
ततस्ते कोपितास्तेन शरैराशीविषोपमै:।
परिवव्रुर्जिघांसन्त: सौभद्रमपराजितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब उन योद्धाओं ने अभिमन्यु से चिढ़कर उसे विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों से घेर लिया और उस अजेय सुभद्रापुत्र को मार डालने की इच्छा से उसे घेर लिया।
 
Then those warriors, irritated with Abhimanyu, surrounded him with their fierce arrows, like poisonous serpents, wishing to kill the invincible son of Subhadra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)