श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.37.11 
तान्यन्तरिक्षे चिच्छेद पौत्रस्ते निशितै: शरै:।
तांश्चैव प्रतिविव्याध तदद्भुतमिवाभवत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परंतु आपके वीर पौत्र ने अपने तीखे बाणों से आकाश में स्थित उन शत्रु समूहों को काट डाला तथा उन समस्त महारथियों को भी घायल कर दिया - यह आश्चर्य की बात थी ॥11॥
 
But your valiant grandson, with his sharp arrows, cut down those enemy groups in the sky and also wounded all those great warriors - this was an astonishing thing. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)