Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.37.10: आर्य! तब उन महारथियों ने उसे अपने रथों सहित एक कोठरी में बंद करके उस पर नाना प्रकार के चिह्नों वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.37.10 
त एनं कोष्ठकीकृत्य रथवंशेन मारिष।
व्यसृजन्निषुजालानि नानालिङ्गानि सङ्घश:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आर्य! तब उन महारथियों ने उसे अपने रथों सहित एक कोठरी में बंद करके उस पर नाना प्रकार के चिह्नों वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Arya! Then those great warriors, having enclosed him in a cell with their chariots, began to shower upon him groups of arrows bearing various kinds of marks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)