श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  7.36.d1 
(तदभेद्यमनाधृष्यं द्रोणानीकं सुदुर्जयम्।
भित्त्वाऽऽर्जुनिरसम्भ्रान्तो विवेशाचिन्त्यविक्रम:॥)
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु का पराक्रम अकल्पनीय था। उसने बिना किसी भय के द्रोणाचार्य के अत्यंत दुर्जेय एवं विकट सैन्य व्यूह को तोड़कर उसके भीतर प्रवेश किया।
 
Abhimanyu's bravery was unimaginable. Without any fear, he broke the extremely formidable and formidable military array of Dronacharya and entered inside it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)