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mahabharat 7.36.7-8h: ‘यह सम्पूर्ण शत्रु सेना मेरे बल के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं है। हे सूतनन्दन! यदि युद्ध में मेरे मामा श्रीकृष्ण, जो जगतविजयी और साक्षात् विष्णुस्वरूप हैं, और मेरे पिता अर्जुन भी मेरे विरोधी हों, तो भी मैं नहीं डरूँगा।’॥7 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  7.36.7-8h 
न ममैतद् द्विषत्सैन्यं कलामर्हति षोडशीम्।
अपि विश्वजितं विष्णुं मातुलं प्राप्य सूतज॥ ७॥
पितरं चार्जुनं युद्धे न भीर्मामुपयास्यति।
 
 
अनुवाद
‘यह सम्पूर्ण शत्रु सेना मेरे बल के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं है। हे सूतनन्दन! यदि युद्ध में मेरे मामा श्रीकृष्ण, जो जगतविजयी और साक्षात् विष्णुस्वरूप हैं, और मेरे पिता अर्जुन भी मेरे विरोधी हों, तो भी मैं नहीं डरूँगा।’॥7 1/2॥
 
‘This entire enemy army is not even equal to one sixteenth of my strength. O son of Sutanandan! I will not be afraid even if I find my uncle Shri Krishna, who is the conqueror of the world and is the embodiment of Vishnu, and my father Arjun as my opponents in the war.’॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)