श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  7.36.5-6 
ततोऽभिमन्यु: प्रहसन् सारथिं वाक्यमब्रवीत्।
सारथे को न्वयं द्रोण: समग्रं क्षत्रमेव वा॥ ५॥
ऐरावतगतं शक्रं सहामरगणैरहम्।
अथवा रुद्रमीशानं सर्वभूतगणार्चितम्।
योधयेयं रणमुखे न मे क्षत्रेऽद्य विस्मय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब अभिमन्यु ने मुस्कुराते हुए सारथि से कहा, 'सारथि! द्रोणाचार्य या समस्त क्षत्रिय समूह की तो बात ही छोड़ दीजिए, मैं तो ऐरावत पर सवार समस्त देवताओं सहित इन्द्र या समस्त प्राणियों द्वारा पूजित तथा सबके ईश्वर रुद्रदेव के सामने भी खड़ा हो सकता हूँ। इसलिए आज मुझे इस क्षत्रिय समूह से युद्ध करने में कोई आश्चर्य नहीं हो रहा है।'
 
Then Abhimanyu smilingly said to the charioteer, 'Charioteer! Forget about Dronacharya or the entire Kshatriya group, I can even stand face to face with Indra along with all the gods riding on Airavat or Rudradev, worshipped by all creatures and the God of all. Therefore, I am not surprised today in fighting with this group of Kshatriyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)