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mahabharat 7.36.4: द्रोणाचार्य युद्धकला के विद्वान हैं और उन्होंने उत्तम अस्त्र-शस्त्र सीखने के लिए बहुत परिश्रम किया है। तुम बड़े आराम और लाड़-प्यार में पले-बढ़े हो। तुम युद्धकला में उनके समान निपुण नहीं हो।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.36.4 
आचार्यो हि कृती द्रोण: परमास्त्रे कृतश्रम:।
अत्यन्तसुखसंवृद्धस्त्वं चायुद्धविशारद:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य युद्धकला के विद्वान हैं और उन्होंने उत्तम अस्त्र-शस्त्र सीखने के लिए बहुत परिश्रम किया है। तुम बड़े आराम और लाड़-प्यार में पले-बढ़े हो। तुम युद्धकला में उनके समान निपुण नहीं हो।॥4॥
 
Dronacharya is a scholar of the art of warfare and has worked very hard to learn the best weapons. You have grown up in great comfort and pampering. You are not as proficient in the art of war as he is.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)