श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  7.36.17-19 
नानावादित्रनिनदै: क्ष्वेडितोत्क्रुष्टगर्जितै:।
हुंकारै: सिंहनादैश्च तिष्ठ तिष्ठेति नि:स्वनै:॥ १७॥
घोरैर्हलहलाशब्दैर्मा गास्तिष्ठैहि मामिति।
असावहममुत्रेति प्रवदन्तो मुहुर्मुहु:॥ १८॥
बृंहितै: सिंजितैर्हासै: करनेमिस्वनैरपि।
संनादयन्तो वसुधामभिदुद्रुवुरार्जुनिम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के वाद्यों की ध्वनि, कोलाहल, ललकार, गर्जना, गुर्राहट, दहाड़, ‘रुको, रुको’ की पुकार तथा ‘मत जाओ, स्थिर रहो, मेरे पास आओ, मैं तुम्हारा शत्रु हूँ’ आदि बड़े कोलाहल के साथ वीर सैनिकों ने अर्जुन के पुत्र पर आक्रमण किया, जिससे सारी पृथ्वी हाथियों की चिंघाड़, घंटियों की झनकार, जोर-जोर से हँसी, तालियों की ध्वनि तथा पहियों की घरघराहट से गूंज उठी।
 
With the sounds of various kinds of musical instruments, uproar, challenges, roars, growls, roars, cries of 'Wait, wait' and loud uproar, saying 'Don't go, stand still, come to me, I am your enemy,' etc., the brave soldiers attacked Arjun's son, making the whole earth resound with the trumpeting of elephants, the tinkling of bells, loud laughter, the clapping of hands and the whirring of wheels.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)