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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.36.15 
प्रवर्तमाने संग्रामे तस्मिन्नतिभयंकरे।
द्रोणस्य मिषतो व्यूहं भित्वा प्राविशदार्जुनि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह भीषण युद्ध अभी चल ही रहा था कि द्रोणाचार्य की आंखों के सामने अर्जुन पुत्र अभिमन्यु सेना को तोड़कर अंदर घुस आया।
 
That fierce battle was still going on when, in front of Dronacharya's eyes, Arjun's son Abhimanyu broke through the formation and entered inside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)