Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.36.12: अभिमन्यु की ऊँची और विशाल ध्वजा पर कर्णिकार का चिह्न अंकित था। उसने स्वर्ण-कवच धारण किया हुआ था। अर्जुन का पुत्र अपने पिता अर्जुन से भी अधिक वीर था। जैसे सिंह का बालक हाथियों पर आक्रमण करता है, उसी प्रकार अभिमन्यु ने युद्ध की इच्छा से द्रोण आदि महारथियों पर आक्रमण किया।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 36: अभिमन्युका उत्साह तथा उसके द्वारा कौरवोंकी चतुरंगिणी सेनाका संहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.36.12 
स कर्णिकारप्रवरोच्छ्रितध्वज:
सुवर्णवर्मार्जुनिरर्जुनाद् वर:।
युयुत्सया द्रोणमुखान् महारथान्
समासदत् सिंहशिशुर्यथा द्विपान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु की ऊँची और विशाल ध्वजा पर कर्णिकार का चिह्न अंकित था। उसने स्वर्ण-कवच धारण किया हुआ था। अर्जुन का पुत्र अपने पिता अर्जुन से भी अधिक वीर था। जैसे सिंह का बालक हाथियों पर आक्रमण करता है, उसी प्रकार अभिमन्यु ने युद्ध की इच्छा से द्रोण आदि महारथियों पर आक्रमण किया।॥12॥
 
Abhimanyu's tall and great flag had the symbol of Karnikaara on it. He was wearing a golden armour. Arjun's son was a braver than his father Arjun. Just like a lion's child attacks elephants, in the same way Abhimanyu attacked great warriors like Drona with the desire to fight.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)