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mahabharat 7.35.29: युधिष्ठिर बोले, 'हे सुभद्रपुत्र! ऐसे सुन्दर वचन बोलते हुए तुम्हारा बल निरन्तर बढ़ता रहे, क्योंकि तुम द्रोणाचार्य की दुर्गम सेना में प्रवेश करने के लिए उत्सुक हो।   |   mahabharat अध्याय 7.35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.35.29 
युधिष्ठिर उवाच
एवं ते भाषमाणस्य बलं सौभद्र वर्धताम्।
यत् समुत्सहसे भेत्तुं द्रोणानीकं दुरासदम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, 'हे सुभद्रपुत्र! ऐसे सुन्दर वचन बोलते हुए तुम्हारा बल निरन्तर बढ़ता रहे, क्योंकि तुम द्रोणाचार्य की दुर्गम सेना में प्रवेश करने के लिए उत्सुक हो।
 
Yudhishthira said, 'O son of Subhadra! May your strength continue to increase as you speak such eloquent words, because you are eager to enter the inaccessible army of Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)