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mahabharat 7.35.25: आज मैं एक ऐसा कार्य करूँगा जो मेरे पिता और माता दोनों के कुलों के लिए लाभदायक होगा तथा जिससे मेरे चाचा श्रीकृष्ण और पिता अर्जुन दोनों प्रसन्न होंगे॥25॥   |   mahabharat अध्याय 7.35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.35.25 
तत् कर्माद्य करिष्यामि हितं यद् वंशयोर्द्वयो:।
मातुलस्य च यत् प्रीतिं करिष्यति पितुश्च मे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
आज मैं एक ऐसा कार्य करूँगा जो मेरे पिता और माता दोनों के कुलों के लिए लाभदायक होगा तथा जिससे मेरे चाचा श्रीकृष्ण और पिता अर्जुन दोनों प्रसन्न होंगे॥25॥
 
Today I will perform a feat which will be beneficial for the clans of both my father and mother and will please both uncle Shri Krishna and father Arjun. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)