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श्लोक  7.35.24 
अभिमन्युरुवाच
अहमेतत् प्रवेक्ष्यामि द्रोणानीकं दुरासदम्।
पतङ्ग इव संक्रुद्धो ज्वलितं जातवेदसम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु ने कहा, "जिस प्रकार चील जलती हुई आग में कूद जाती है, उसी प्रकार मैं भी क्रोध में आकर द्रोणाचार्य की दुर्गम सेना में प्रवेश करूँगा।"
 
Abhimanyu said, "Just as a kite jumps into a burning fire, in the same way, in anger, I too shall enter the inaccessible military array of Dronacharya."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)