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mahabharat 7.35.17: "पिताजी! यदि हम विजयी न हुए, तो युद्ध से लौटकर अर्जुन अवश्य ही हमें शाप देंगे। अतः आप अपने शस्त्र उठाइए और शीघ्र ही द्रोणाचार्य की सेना का संहार कर दीजिए।" ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 7.35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.35.17 
धनंजयो हि नस्तात गर्हयेदेत्य संयुगात्।
क्षिप्रमस्त्रं समादाय द्रोणानीकं विशातय॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"पिताजी! यदि हम विजयी न हुए, तो युद्ध से लौटकर अर्जुन अवश्य ही हमें शाप देंगे। अतः आप अपने शस्त्र उठाइए और शीघ्र ही द्रोणाचार्य की सेना का संहार कर दीजिए।" ॥17॥
 
"Father! If we are not victorious, Arjuna will surely curse us upon returning from the war. Therefore, take up your weapons and quickly destroy Dronacharya's army." ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)