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एत्य नो नार्जुनो गर्हेद् यथा तात तथा कुरु।
चक्रव्यूहस्य न वयं विद्मो भेदं कथंचन॥ १४॥
अनुवाद
पिताजी! हमारी ऐसी निन्दा न करें (हमें अयोग्य न कहें) कि अर्जुन संशप्तकों से युद्ध करके लौट आए। हम चक्रव्यूह भेदने की विधि किसी भी प्रकार नहीं जानते।'
‘Father! Do not criticize us (do not call us incapable) in such a way that Arjuna returns from the war with the Samshaptakas. We do not know the process of breaking the Chakravyuh in any way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥