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mahabharat 7.35.11: उसी क्रोधित द्रोणाचार्य को आते देख राजा युधिष्ठिर ने उन्हें रोकने का उपाय बार-बार सोचा ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.35.11 
तमायान्तमभिक्रुद्धं द्रोणं दृष्ट्वा युधिष्ठिर:।
बहुधा चिन्तयामास द्रोणस्य प्रतिवारणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसी क्रोधित द्रोणाचार्य को आते देख राजा युधिष्ठिर ने उन्हें रोकने का उपाय बार-बार सोचा ॥11॥
 
Seeing the same angry Dronacharya approaching, King Yudhishthira repeatedly deliberated on a way to stop him. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)