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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.35.1 
संजय उवाच
तदनीकमनाधृष्यं भारद्वाजेन रक्षितम्।
पार्था: समभ्यवर्तन्त भीमसेनपुरोगमा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! भीमसेन और कुन्तीपुत्रों ने द्रोणाचार्य द्वारा रक्षित उस भयंकर सेना का वीरतापूर्वक सामना किया॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Bhimsen and Kunti's sons bravely faced that fierce army protected by Dronacharya. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)