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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.34.21 
चामरव्यजनाक्षेपैरुदयन्निव भास्कर:।
प्रमुखे तस्य सैन्यस्य द्रोणोऽवस्थितनायक:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसके दोनों ओर पंखे और थालियाँ लहरा रही थीं। वह सूर्योदय की तरह चमक रहा था। सेनापति द्रोणाचार्य उस सेना के सबसे आगे खड़े थे।
 
Fans and dishes were being waved on both sides of him. He was shining like the sunrise. Commander Dronacharya was standing at the front of that army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)