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mahabharat 7.34.16: सब रथों पर लाल ध्वजाएँ लहरा रही थीं, सबने स्वर्ण मालाएँ धारण की हुई थीं, सबके शरीर पर चंदन और अगुरु का लेप लगा हुआ था और सब लोग पुष्पमालाओं और सुन्दर वस्त्रों से अलंकृत थे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.34.16 
सर्वे रक्तपताकाश्च सर्वे वै हेममालिन:।
चन्दनागुरुदिग्धाङ्गा स्रग्विण: सूक्ष्मवासस:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सब रथों पर लाल ध्वजाएँ लहरा रही थीं, सबने स्वर्ण मालाएँ धारण की हुई थीं, सबके शरीर पर चंदन और अगुरु का लेप लगा हुआ था और सब लोग पुष्पमालाओं और सुन्दर वस्त्रों से अलंकृत थे॥16॥
 
Red flags were fluttering on all the chariots, everyone wore golden garlands, everyone's body was anointed with sandalwood and aguru paste and everyone was decked with flower garlands and fine clothes.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)