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mahabharat 7.34.14: बाणों के स्थान पर सूर्य के समान तेजस्वी राजकुमारों को खड़ा कर दिया गया। उस समय राजकुमारों का सारा समूह वहाँ एकत्रित हो गया था॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.34.14 
आरास्थानेषु विन्यस्ता: कुमारा: सूर्यवर्चस:।
संघातो राजपुत्राणां सर्वेषामभवत् तदा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
बाणों के स्थान पर सूर्य के समान तेजस्वी राजकुमारों को खड़ा कर दिया गया। उस समय राजकुमारों का सारा समूह वहाँ एकत्रित हो गया था॥14॥
 
In place of the arrows, princes as radiant as the Sun were made to stand there. At that time, the entire group of princes had gathered there.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)