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mahabharat 7.34.12: संजय ने कहा - हे राजन! शान्त हो जाओ और अपने हृदय में उस दुःख को रोक लो, जिसे सहना कठिन है। मैं तुम्हारे सम्बन्धियों के महान विनाश का वर्णन करूँगा; उसे सुनो। ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.34.12 
संजय उवाच
स्थिरो भव महाराज शोकं धारय दुर्धरम्।
महान्तं बन्धुनाशं ते कथयिष्यामि तच्छृणु॥ १२॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - हे राजन! शान्त हो जाओ और अपने हृदय में उस दुःख को रोक लो, जिसे सहना कठिन है। मैं तुम्हारे सम्बन्धियों के महान विनाश का वर्णन करूँगा; उसे सुनो। ॥12॥
 
Sanjaya said, "O King, be calm and hold back the grief which is difficult to bear in your heart. I will tell you about the great destruction of your relatives; listen to it." ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)