श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 34: संजयके द्वारा अभिमन्युकी प्रशंसा, द्रोणाचार्यद्वारा चक्रव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.34.1 
संजय उवाच
समरेऽत्युग्रकर्माण: कर्मभिर्व्यञ्जितश्रमा:।
सकृष्णा: पाण्डवा: पञ्च देवैरपि दुरासदा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! श्रीकृष्ण सहित पाँचों पाण्डव देवताओं के लिए भी अजेय हैं। वे युद्धभूमि में अत्यन्त भयंकर कर्म करते हैं। उनके कर्मों से उनका परिश्रम प्रकट होता है॥1॥
 
Sanjaya says - O King! The five Pandavas including Shri Krishna are invincible even for the gods. They perform extremely dreadful deeds in the battlefield. Their hard work is expressed through their deeds.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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