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mahabharat 7.33.19: भारत! यद्यपि उस चक्रव्यूह को भेदना अत्यन्त कठिन कार्य था, फिर भी वीर अभिमन्यु ने अपने मामा युधिष्ठिर के आदेशानुसार उसे बार-बार भेद डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.33.19 
तं चाभिमन्युर्वचनात् पितुर्ज्येष्ठस्य भारत।
बिभेद दुर्भिदं संख्ये चक्रव्यूहमनेकधा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भारत! यद्यपि उस चक्रव्यूह को भेदना अत्यन्त कठिन कार्य था, फिर भी वीर अभिमन्यु ने अपने मामा युधिष्ठिर के आदेशानुसार उसे बार-बार भेद डाला।
 
Bhaarat! Although breaking through that Chakravyuha was a very difficult task, yet the valiant Abhimanyu, on the orders of his uncle Yudhishthira, broke through it again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)