श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.33.17 
ततोऽर्जुनस्याथ परै: सार्धं समभवद् रण:।
तादृशो यादृशो नान्य: श्रुतो दृष्टोऽपि वा क्वचित्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अर्जुन ने अपने शत्रुओं के साथ ऐसा भयंकर युद्ध किया, जैसा न तो कहीं देखा गया है और न कहीं सुना गया है ॥17॥
 
There Arjuna fought a fierce battle with his enemies, the like of which has neither been seen nor heard of anywhere. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)