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mahabharat 7.33.16: द्रोणाचार्य के ऐसा कहने पर संशप्तकगण पुनः दक्षिण की ओर गए और अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा।   |   mahabharat अध्याय 7.33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.33.16 
द्रोणेन व्याहृते त्वेवं संशप्तकगणा: पुन:।
आह्वयन्नर्जुनं संख्ये दक्षिणामभितो दिशम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के ऐसा कहने पर संशप्तकगण पुनः दक्षिण की ओर गए और अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा।
 
After Dronacharya said this, the Samshaptakas once again went towards the south and challenged Arjun for battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)