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mahabharat 7.33.15: अर्जुन के लिए युद्ध विषयक कोई भी बात अज्ञात या असंभव नहीं है। उसने युद्ध विषयक सारा ज्ञान इधर-उधर से प्राप्त किया है।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.33.15 
न ह्यज्ञातमसाध्यं वा तस्य संख्येऽस्ति किंचन।
तेन ह्युपात्तं सकलं सर्वज्ञानमितस्तत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के लिए युद्ध विषयक कोई भी बात अज्ञात या असंभव नहीं है। उसने युद्ध विषयक सारा ज्ञान इधर-उधर से प्राप्त किया है।॥15॥
 
‘There is nothing about war that is unknown or impossible for Arjun. He has acquired all the knowledge about war from here and there.’॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)