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mahabharat 7.33.14: राजन! आज मैं ऐसी व्यूह रचना करूँगा जिसे देवता भी नहीं तोड़ सकेंगे; किन्तु आप कृपा करके किसी प्रकार अर्जुन को यहाँ से हटा दीजिए॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.33.14 
तं च व्यूहं विधास्यामि योऽभेद्यस्त्रिदशैरपि।
योगेन केनचिद् राजन्नर्जुनस्त्वपनीयताम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! आज मैं ऐसी व्यूह रचना करूँगा जिसे देवता भी नहीं तोड़ सकेंगे; किन्तु आप कृपा करके किसी प्रकार अर्जुन को यहाँ से हटा दीजिए॥14॥
 
King! Today I will create a formation which even the gods cannot break; but please remove Arjuna from here by some means.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)