vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन
»
श्लोक 12
श्लोक
7.33.12
विश्वसृग् यत्र गोविन्द: पृतनानीस्तथार्जुन:।
तत्र कस्य बलं क्रामेदन्यत्र त्र्यम्बकात् प्रभो:॥ १२॥
अनुवाद
जहाँ जगत के रचयिता भगवान श्रीकृष्ण हैं और सेनापति अर्जुन हैं, वहाँ भगवान शंकर के बल के अतिरिक्त कोई दूसरा पुरुष काम नहीं कर सकता॥12॥
Where the creator of the world is Lord Shri Krishna and Arjun is the commander, there no other man other than Lord Shankar's strength can work. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×