ततोऽप्रीतस्तथोक्त: सन् भारद्वाजोऽब्रवीन्नृपम्।
नार्हसे मां तथा ज्ञातुं घटमानं तव प्रिये॥ १०॥
अनुवाद
दुर्योधन की बात सुनकर द्रोणाचार्य को कुछ भी अच्छा नहीं लगा। वे दुःखी होकर राजा से इस प्रकार बोले - 'हे राजन! आप मुझे वचनभंग करने वाला न समझें। मैं आपको प्रसन्न करने का भरसक प्रयत्न कर रहा हूँ॥ 10॥
Dronacharya was not at all pleased at Duryodhan's words. He became sad and spoke to the king thus - 'O King! You should not think of me as someone who has broken his promise. I am trying my best to please you.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥