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mahabharat 7.32.71-72h: उधर, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, अभिमन्यु, अर्जुन, नकुल और सहदेव युद्धभूमि में सात्यकि की रक्षा करने लगे। 71 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 71-72h
 
 
श्लोक  7.32.71-72h 
धृष्टद्युम्नश्च भीमश्च सौभद्रोऽर्जुन एव च॥ ७१॥
नकुल: सहदेवश्च सात्यकिं जुगुपू रणे।
 
 
अनुवाद
उधर, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, अभिमन्यु, अर्जुन, नकुल और सहदेव युद्धभूमि में सात्यकि की रक्षा करने लगे। 71 1/2॥
 
On the other hand, Dhrishtadyumna, Bhimsen, Abhimanyu, Arjun, Nakul and Sahadeva started protecting Satyaki in the battlefield. 71 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)