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mahabharat 7.32.70-71h: उस समय आपकी सेना के पैदल, घुड़सवार, रथी और हाथी सवार सहित सैकड़ों अन्य योद्धा सात्यकि से भयभीत होकर कर्ण के पीछे दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  7.32.70-71h 
पत्त्यश्वरथमातङ्गास्त्वदीया: शतशोऽपरे॥ ७०॥
कर्णमेवाभ्यधावन्त त्रास्यमाना: प्रहारिण:।
 
 
अनुवाद
उस समय आपकी सेना के पैदल, घुड़सवार, रथी और हाथी सवार सहित सैकड़ों अन्य योद्धा सात्यकि से भयभीत होकर कर्ण के पीछे दौड़े।
 
At that time hundreds of other warriors of your army, including infantry, horse-riders, charioteers and elephant-riders, frightened by Satyaki, ran after Karna. 70 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)