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mahabharat 7.32.63-64h: तत्पश्चात् भीमसेन गरुड़ के समान अपने रथ से कूद पड़े और अपनी उत्तम तलवार से कर्ण के पक्ष के पन्द्रह योद्धाओं को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  7.32.63-64h 
ततो भीम: समुत्पत्य स्वरथाद् वैनतेयवत्॥ ६३॥
वरासिना कर्णपक्षान् जघान दश पञ्च च।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीमसेन गरुड़ के समान अपने रथ से कूद पड़े और अपनी उत्तम तलवार से कर्ण के पक्ष के पन्द्रह योद्धाओं को मार डाला।
 
Thereafter Bhimasena leapt from his chariot like Garuda and killed fifteen warriors of Karna's side with his excellent sword. 63 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)