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mahabharat 7.32.61-62h: तत्पश्चात् छः योद्धाओं ने शत्रुंजय को मार डाला और भाले से रथ पर बैठे हुए विपात का सिर क्षण भर में काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  7.32.61-62h 
तत: शत्रुंजयं हत्वा पार्थ: षड्‍‍भिरजिह्मगै:॥ ६१॥
जहार सद्यो भल्लेन विपाटस्य शिरो रथात्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् छः योद्धाओं ने शत्रुंजय को मार डाला और भाले से रथ पर बैठे हुए विपात का सिर क्षण भर में काट डाला।
 
Thereafter the six warriors who went straight killed Shatrunjaya, and with a spear the head of Vipata who was sitting on the chariot was cut off in an instant. 61 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)