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mahabharat 7.32.55-56h: उसी समय धृष्टद्युम्न, भीम और महाबली सात्यकि भी कर्ण के पास पहुँचे और उसे तीन-तीन बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  7.32.55-56h 
धृष्टद्युम्नश्च भीमश्च सात्यकिश्च महारथ:॥ ५५॥
विव्यधु: कर्णमासाद्य त्रिभिस्त्रिभिरजिह्मगै:।
 
 
अनुवाद
उसी समय धृष्टद्युम्न, भीम और महाबली सात्यकि भी कर्ण के पास पहुँचे और उसे तीन-तीन बाणों से घायल कर दिया।
 
At the same time Dhrishtadyumna, Bhima and the mighty warrior Satyaki also reached Karna and wounded him with three arrows each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)