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mahabharat 7.32.52-53h: उस समय शस्त्रविद्याओं में श्रेष्ठ, भरतवंशियों में श्रेष्ठ योद्धा और सम्पूर्ण भारतीय सेना को आनन्द प्रदान करने वाले कर्ण ने आग्नेयास्त्र प्रकट किया ॥52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.32.52-53h 
स भारतरथश्रेष्ठ: सर्वभारतहर्षण:॥ ५२॥
प्रादुश्चक्रे तदाग्नेयमस्त्रमस्त्रविदां वर:।
 
 
अनुवाद
उस समय शस्त्रविद्याओं में श्रेष्ठ, भरतवंशियों में श्रेष्ठ योद्धा और सम्पूर्ण भारतीय सेना को आनन्द प्रदान करने वाले कर्ण ने आग्नेयास्त्र प्रकट किया ॥52 1/2॥
 
At that time, Karna, the best among weapons experts, the best warrior of the Bharatas and the one who brings joy to the entire Indian army, revealed the firearm. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)