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mahabharat 7.32.51-52h: तब अधिरथपुत्र कर्ण ने उन शरणागत सैनिकों की करुण पुकार सुनकर उन्हें आश्वस्त किया और कहा, 'डरो मत' और अर्जुन का सामना करने के लिए आगे बढ़ा।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.32.51-52h 
तमाधिरथिराक्रन्दं विज्ञाय शरणैषिणाम्॥ ५१॥
मा भैष्टेति प्रतिश्रुत्य ययावभिमुखोऽर्जुनम्।
 
 
अनुवाद
तब अधिरथपुत्र कर्ण ने उन शरणागत सैनिकों की करुण पुकार सुनकर उन्हें आश्वस्त किया और कहा, 'डरो मत' और अर्जुन का सामना करने के लिए आगे बढ़ा।
 
Then Karna, son of Adhiratha, hearing the pitiful cries of those refugee soldiers, reassured them saying, 'Don't be afraid' and proceeded to face Arjuna. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)