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mahabharat 7.32.46-47h: जैसे प्रलयकाल में प्रकट होने वाली अग्नि समस्त तत्त्वों को जला डालती है, उसी प्रकार अर्जुन ने अपने अस्त्रों के तेज से समस्त कौरव सैनिकों को जलाना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.32.46-47h 
प्रददाह कुरून् सर्वानर्जुन: शस्त्रतेजसा॥ ४६॥
युगान्ते सर्वभूतानि धूमकेतुरिवोत्थित:।
 
 
अनुवाद
जैसे प्रलयकाल में प्रकट होने वाली अग्नि समस्त तत्त्वों को जला डालती है, उसी प्रकार अर्जुन ने अपने अस्त्रों के तेज से समस्त कौरव सैनिकों को जलाना आरम्भ कर दिया।
 
Just as the fire that appears during the time of Pralaya burns all elements, similarly Arjuna began to burn all the Kaurava soldiers with the brilliance of his weapons. 46 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)