Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.32.45-46h: पाण्डववंश का वह सूर्य प्रलयकाल में अपनी खगोलीय किरणों से संकटों के उस समुद्र को भिगोकर कौरव सैनिकों को भी पीड़ा देने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.32.45-46h 
संशप्तकसमुद्रं तमुच्छोष्यास्त्रगभस्तिभि:॥ ४५॥
स पाण्डवयुगान्तार्क: कुरूनप्यभ्यतीतपत्।
 
 
अनुवाद
पाण्डववंश का वह सूर्य प्रलयकाल में अपनी खगोलीय किरणों से संकटों के उस समुद्र को भिगोकर कौरव सैनिकों को भी पीड़ा देने लगा।
 
That sun of the Pandava dynasty at the time of doomsday, by soaking up that sea of ​​troubles with its astronomical rays, began to tormenting even the Kaurava soldiers. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)