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mahabharat 7.32.42-43h: इस समय अर्जुन अनेक संशप्तकों को पराजित करके उस स्थान पर आये, जहाँ आचार्य द्रोण पाण्डव सैनिकों का संहार कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  7.32.42-43h 
एतस्मिन्नन्तरे जिष्णुर्जित्वा संशप्तकान् बहून्॥ ४२॥
अभ्ययात् तत्र यत्रासौ द्रोण: पाण्डून् प्रमर्दति।
 
 
अनुवाद
इस समय अर्जुन अनेक संशप्तकों को पराजित करके उस स्थान पर आये, जहाँ आचार्य द्रोण पाण्डव सैनिकों का संहार कर रहे थे।
 
At this time, Arjun, after defeating many Sanshaptakas, came to the place where Acharya Drona was slaying the Pandava soldiers. 42 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)