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mahabharat 7.32.40-41h: यह देखकर द्रोणाचार्य अत्यन्त क्रोधित हो गये और उन्होंने सैकड़ों बाणों की वर्षा करके चेदि, पांचाल तथा पाण्डव योद्धाओं का भारी संहार आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.32.40-41h 
ततो द्रोणोऽतिसंक्रुद्धो विसृजञ्छतश: शरान्॥ ४०॥
चेदिपञ्चालपाण्डूनामकरोत् कदनं महत्।
 
 
अनुवाद
यह देखकर द्रोणाचार्य अत्यन्त क्रोधित हो गये और उन्होंने सैकड़ों बाणों की वर्षा करके चेदि, पांचाल तथा पाण्डव योद्धाओं का भारी संहार आरम्भ कर दिया।
 
Seeing this, Dronacharya became very angry and started a massive massacre of Chedi, Panchala and Pandava warriors by showering hundreds of arrows. 40 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)