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mahabharat 7.32.38-39h: तब द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, राजा जयद्रथ, अवंती राजकुमार विन्द और अनुविन्द तथा राजा शल्य ने मिलकर इन हमलावरों को रोका। 38 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.32.38-39h 
ततो द्रोण: कृप: कर्णो द्रौणी राजा जयद्रथ:॥ ३८॥
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ शल्यश्चैतान् न्यवारयन्।
 
 
अनुवाद
तब द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, राजा जयद्रथ, अवंती राजकुमार विन्द और अनुविन्द तथा राजा शल्य ने मिलकर इन हमलावरों को रोका। 38 1/2
 
Then Dronacharya, Krupacharya, Karna, Ashwatthama, King Jayadratha, Avanti princes Vind and Anuvind and King Shalya together stopped these attackers. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)