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mahabharat 7.32.36-37h: तत्पश्चात् पाण्डवों ने अपने सेनापति की आज्ञा मानकर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर द्रोणाचार्य के रथ पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे हंसों का समूह चारों ओर से उड़कर सरोवर की ओर आता है।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.32.36-37h 
कुर्वन्त: शासनं तस्य पाण्डवा बाहुशालिन:॥ ३६॥
सरो हंसा इवापेतुर्घ्नन्तो द्रोणरथं प्रति।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पाण्डवों ने अपने सेनापति की आज्ञा मानकर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर द्रोणाचार्य के रथ पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे हंसों का समूह चारों ओर से उड़कर सरोवर की ओर आता है।
 
Thereafter, the Pandavas, adorned with their arms, in obedience to the command of their commander, attacked Dronacharya's chariot, just as a multitude of swans fly from all directions to a lake. 36 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)